शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री नरसिंह गायत्री मंत्र
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नारसिंहः प्रचोदयात्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्रुति/गायत्री मंत्र
स्वरूपसर्व-स्वरूप नरसिंह
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम उन भगवान का स्मरण करते हैं जिनके नख वज्र के समान हैं, हम उन तीक्ष्ण दांतों वाले देव का ध्यान करते हैं। वे नरसिंह हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आध्यात्मिक जागरण, बुद्धि की प्रखरता, इन्द्रिय निग्रह और सांसारिक दुविधाओं से पूर्ण मुक्ति
विस्तृत लाभ
आध्यात्मिक जागरण, बुद्धि की प्रखरता, इन्द्रिय निग्रह और सांसारिक दुविधाओं से पूर्ण मुक्ति।
जप काल
ब्रह्म मुहूर्त में स्फटिक या तुलसी माला से 108 बार जप।
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