शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ अनिरुद्धाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारचतुर्थ व्यूह मंत्र
स्वरूपशक्ति और तेज के अधिपति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं शक्ति और तेज से संपन्न, अजेय अनिरुद्ध को प्रणाम करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अहंकार (Ahamkara) का शुद्धिकरण और अजेय शक्ति की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
अहंकार (Ahamkara) का शुद्धिकरण और अजेय शक्ति की प्राप्ति 39।
जप काल
वैराग्य और तेजस्विता की साधना में।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशुतेजस्विनी, या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी।
ॐ सर्वतीर्थात्मकाय नमः
ॐ शिवायै नमः
ॐ दक्षाध्वरहराय नमः
ॐ विपुलांसाय नमः