शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ अव्ययाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपअविनाशी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका कभी विनाश, ह्रास या स्वरूप-परिवर्तन नहीं होता।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्थिरता
विस्तृत लाभ
स्थिरता
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अशोकायै नमः
ॐ वेदान्तसारसन्दोहाय नमः
ॐ निर्गुणाय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये भूतभविष्यत् तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥