शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ बाणासुरकरान्तकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपबाणासुर-मान-मर्दी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
बाणासुर की सहस्र भुजाओं को काटने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अहंकार के शमन हेतु
विस्तृत लाभ
अहंकार के शमन हेतु
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अन्तर्याम्यै नमः
ॐ यश्छन्दसामृषभो विश्वरूपः। छन्दोभ्योऽध्यमृतात्सम्बभूव। स मेन्द्रो मेधया स्पृणोतु। अमृतस्य देव धारणो भूयासम्॥
ॐ गरुडध्वजाय नमः
ॐ दुर्गमतायै नमः
न मृत्युर्न शंका न मे जातिभेदः... चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥
दक्षिणे चंड भैरवाय नमः दक्षिणे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।