ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

अथर्वशीर्ष शांति पाठ

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायुः ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारशांति पाठ
स्वरूपनिर्गुण परब्रह्म गणपति
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे देवगण, हम अपने कानों से कल्याणकारी वचन सुनें, आंखों से कल्याणकारी दृश्य देखें, और सुदृढ़ अंगों से स्तुति करते हुए ईश्वर द्वारा प्रदत्त आयु का उपभोग करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

शारीरिक स्वास्थ्य, लंबी आयु और सकारात्मक ऊर्जा का संचार

विस्तृत लाभ

शारीरिक स्वास्थ्य, लंबी आयु और सकारात्मक ऊर्जा का संचार।

जप काल

अथर्वशीर्ष के मुख्य पाठ से पूर्व स्वस्तिवाचन के रूप में।

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