शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ ब्रह्मसूत्रधराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपयज्ञोपवीत धारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो पवित्र ब्रह्मसूत्र (जनेऊ) को सदा धारण करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संस्कार शुद्धि
विस्तृत लाभ
संस्कार शुद्धि
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे। मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम्॥
ॐ करवालप्रहारिण्यै नमः
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च॥
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः ॥ त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः ॥ त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि ॥ त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि ॥ त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥
प्रणवः पातु मे कण्ठं स्कन्धौ मे पञ्चवक्त्रकः
हुं नमो भगवते महाकाल भैरवाय कालाग्नितॆजसे अमुक शत्रुं मारय-मारय पोथय-पोथय हुं फट् स्वाहा।