ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

आत्म-ज्ञान प्राप्ति हेतु मंत्र (राम हृदयम्)

बुद्धिविच्छिन्नचैतन्यमेकं पूर्णमथापरम्। आभासत्वपरं बिम्बभूतमेवं त्रिधा चितिः॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारदार्शनिक श्लोक-मंत्र
स्वरूपज्ञान-स्वरूप राम
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

ज्ञानियों के अनुसार चेतना तीन प्रकार की है—बुद्धि से आच्छादित चेतना, पूर्ण परब्रह्म चेतना, और केवल आभास मात्र (प्रतिबिम्ब) चेतना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

आत्मा, अनात्मा और परमात्मा के मध्य के सूक्ष्म भेद का ज्ञान तथा सांसारिक माया से मुक्ति

विस्तृत लाभ

आत्मा, अनात्मा और परमात्मा के मध्य के सूक्ष्म भेद का ज्ञान तथा सांसारिक माया से मुक्ति 14।

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