आत्म-ज्ञान प्राप्ति हेतु मंत्र (राम हृदयम्)
बुद्धिविच्छिन्नचैतन्यमेकं पूर्णमथापरम्। आभासत्वपरं बिम्बभूतमेवं त्रिधा चितिः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
ज्ञानियों के अनुसार चेतना तीन प्रकार की है—बुद्धि से आच्छादित चेतना, पूर्ण परब्रह्म चेतना, और केवल आभास मात्र (प्रतिबिम्ब) चेतना।
इस मंत्र से क्या होगा?
आत्मा, अनात्मा और परमात्मा के मध्य के सूक्ष्म भेद का ज्ञान तथा सांसारिक माया से मुक्ति
विस्तृत लाभ
आत्मा, अनात्मा और परमात्मा के मध्य के सूक्ष्म भेद का ज्ञान तथा सांसारिक माया से मुक्ति 14।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मध्यं पातु हिरण्याक्ष-वक्षःकुक्षिविदारणः
ॐ अखण्डश्रियै नमः
ॐ कलिकल्मषनाशिन्यै नमः
ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः
ॐ क्रौञ्चदारणाय नमः
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥