शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ दुर्गमगायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अगम्य स्थानों और पारलौकिक सत्ता तक सरलता से पहुँचने वाली हैं।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वाक्च मे मनश्च मे चक्षुश्च मे श्रोत्रं च मे...
ॐ अष्टमूर्तये नमः।
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
ॐ वशीकराय नमः
ॐ क्वणत्काञ्चीविभूषणायै नमः
ॐ वाचं वाणी सदा पातु।