ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

गणेश मंत्र

ॐ दुष्टभूतनिषेविताय नमः।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनामावली मंत्र
स्वरूपबटुक भैरव
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

दुष्ट भूतों द्वारा भी पूजित और सेवित देव को नमन।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सर्व-भय नाश व मोक्ष

विस्तृत लाभ

सर्व-भय नाश व मोक्ष

जप काल

बिल्व पत्र या पुष्प अर्पण

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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥

पाशाङ्कुश स्वदन्त आम्र फलवान् आखुवाहनः । विघ्नान् निहन्तु नः शोणः सृष्टिदक्षो विनायकः ॥

ॐ गुणाकराय नमः

या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ 18

मङ्गलम् भगवान विष्णुः मङ्गलम् गरुणध्वजः

दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥