गणेश मंत्र
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र से क्या होगा?
ॐ, श्रीं, ह्रीं—इन तीन बीजाक्षरों के प्रभाव से जीवन में स्थिरता और मोद
विस्तृत लाभ
ॐ, श्रीं, ह्रीं—इन तीन बीजाक्षरों के प्रभाव से जीवन में स्थिरता और मोद।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ भूतभृते नमः
ॐ अन्नपूर्णायै नमः
घ्राणं पातु महालक्ष्मीः कण्ठं पातु सरस्वती। भुजौ तु पातु वरदा हृदय पातु सुन्दरी॥
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
ॐ अनघास्त्राय नमः
जो अत्यंत तेजस्वी और महाप्रतापी हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: व्यक्तित्व में तेज और ओज की वृद्धि) 19।