शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
षण्मुख कवचम्
इरचेवि हलयुम सेव्वाळ इयलपुडन काक्क वायकै
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्लोक 2
स्वरूपषण्मुख
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
भगवान अपने वेल् (भाले) से मेरे दोनों कानों और मुख की स्वभाविक रूप से रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मुख और कानों से संबंधित व्याधियों का शमन
विस्तृत लाभ
मुख और कानों से संबंधित व्याधियों का शमन।
जप काल
कवच के अंग-न्यास रूप में।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कमलालयामध्यस्थायै नमः
नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि। त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च देहि मे॥
ॐ तत्त्वज्ञानप्रदाय नमः
ॐ नमो भगवते महोग्र दिग्बन्धन नरसिंहाय ज्वालामुखाय अग्निनेत्राय... हन हन दह दह पच पच बन्ध बन्ध कील कील स्वाहा
अश्मा च मे मृत्तिका च मे गिरयश्च मे पर्वताश्च मे...
ॐ भिन्नलोहाय नमः