शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ कङ्कालमाल्यधारिण्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारआद्या काली नाम-मंत्र
स्वरूपआद्या काली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कंकालों (मुण्डों) की माला पहनने वाली (जो अहंकारों का प्रतीक है)।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मृत्यु के भय पर विजय और प्रगाढ़ वैराग्य
विस्तृत लाभ
मृत्यु के भय पर विजय और प्रगाढ़ वैराग्य।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शृतं मे मा प्रहासीः अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि ऋतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ॐ लोकत्रयेशाय नमः।
ॐ श्रुतिगम्याय नमः
ॐ हरिवल्लभायै नमः
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
ॐ चक्रराजाय स्वाहा – हृदयाय नमः