शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भार्गव कवच (वीर-रक्षक)
कथं जयेयुर्वीरेन्द्राः कवचैर्नावृताङ्गकाः। प्रयान्ति भीता रामस्य वर्मणा वीक्ष्य रक्षितम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकवच-मंत्र
स्वरूपवीरेंद्र रक्षक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
बिना कवच से ढके अंगों वाले बड़े-बड़े वीर भी युद्ध कैसे जीत सकते हैं? (अर्थात नहीं जीत सकते)। भगवान राम (परशुराम) के इस अभेद्य कवच से रक्षित व्यक्ति को देखकर शत्रु स्वतः भयभीत होकर भाग जाते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
युद्ध, दुर्घटना या भारी प्रतिस्पर्धा में पूर्ण सुरक्षा और अभय की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
युद्ध, दुर्घटना या भारी प्रतिस्पर्धा में पूर्ण सुरक्षा और अभय की प्राप्ति।
जप काल
घर से किसी विशेष कार्य हेतु निकलते समय पाठ।
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