शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपविराट पुरुष
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
करोड़ों सूर्यों के समान कान्ति वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अवसाद एवं अंधकार नाश
विस्तृत लाभ
अवसाद एवं अंधकार नाश
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पिङ्गाक्षाय नमः
ॐ नमो भगवते संहार भैरवाय भूत प्रेत पिशाच ब्रह्म राक्षसान् उच्चाटय उच्चाटय संहारय संहारय सर्व भय छेदनं कुरु कुरु स्वाहा।
ॐ श्रीहरिप्रियायै नमः
ॐ राक्षसामरगन्धर्वकोटिकोट्यभिवन्दिताय नमः
वीणां कल्पलतां अरिं च वरदं दक्षे विदत्ते करैः वामे तामरसं च रत्नकलशं सन्मञ्जरीं चाभयम् । शुण्डादण्ड लसन्मृगेन्द्रवदनः शङ्खेन्दुगौरः शुभो दीव्यद्रत्ननिभांशुकः गणपतिः पायादपायात्स नः ॥
ॐ अचलायै नमः