शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्। अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारउच्चाटन मंत्र
स्वरूपश्री (दरिद्रता नाशिनी)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
भूख-प्यास रूपी मलिनता वाली अलक्ष्मी का मैं नाश करता हूँ। हे देवी! मेरे घर से असमृद्धि को दूर करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
घर से कलह और अभाव का निष्कासन
विस्तृत लाभ
घर से कलह और अभाव का निष्कासन।
जप काल
झाड़ू/सफाई के पश्चात जप।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं । श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय विराजमूर्तये मेघात्मने श्रीम नरसिंहवपुषे नमः
ॐ शरवणभवाय नमः
ॐ सीतादेवीमुद्राप्रदायकाय नमः
ॐ कपालमालिने नमः।
वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नमः। उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम्॥
ॐ नारसिंहाय नमः