शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ मध्यं पातु हिरण्याक्ष-वक्षःकुक्षिविदारणः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमध्य भाग (पेट) / उग्र स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हिरण्याक्ष (व हिरण्यकशिपु) का वक्ष फाड़ने वाले मेरे मध्य भाग की रक्षा करें। (उदर रोगों से मुक्ति)।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः इति दिग्बन्धः॥
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥
ॐ दीर्घकामाय नमः।
ॐ शक्तिपाणिमते नमः
ॐ प्रभायै नमः
ॐ लम्बोदराय हुं