शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
अग्नि पुराण आधारित गायत्री - 2
ॐ महाज्वालाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारगायत्री मंत्र
स्वरूपतेजोमय वक्रतुण्ड
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम महाज्वाल स्वरूप को जानते हैं, वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं। वे दन्ती हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञान के घोर अंधकार का नाश और आत्मिक तेज की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
अज्ञान के घोर अंधकार का नाश और आत्मिक तेज की प्राप्ति।
जप काल
साधना काल में तेजोमय स्वरूप का ध्यान करते हुए।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र