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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

गणेश पंचरत्न स्तोत्र (श्लोक 1)

मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् । अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारपंचरत्न स्तोत्र-मंत्र
स्वरूपविनायक
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जिनके हाथों में आनंददायक मोदक है, जो मुक्ति के साधक हैं, जिन्होंने सिर पर चंद्रमा धारण किया है, अनाथों के नायक हैं, उन विनायक को मैं नमन करता हूँ।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मोक्ष की प्राप्ति और अशुभ घटनाओं का तत्काल नाश

विस्तृत लाभ

मोक्ष की प्राप्ति और अशुभ घटनाओं का तत्काल नाश।

जप काल

नित्य प्रातःकाल गान स्वरूप में।

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गणेश पंचरत्न स्तोत्र (श्लोक १) | Pauranik