शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ नृकेसरिणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपनृकेसरी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो नर और सिंह (केसरी) के मिश्रित रूप में अद्वितीय हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मनुष्य के भीतर छिपी पशु-प्रवृत्तियों (क्रोध, लोभ, काम) का पूर्ण दमन
विस्तृत लाभ
मनुष्य के भीतर छिपी पशु-प्रवृत्तियों (क्रोध, लोभ, काम) का पूर्ण दमन।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥
ॐ शरभाय नमः
ॐ नमः शिवाय
ॐ पद्मप्रियायै नमः
ॐ अनेकसोमसूर्याग्निगणाकाराय नमः।
ॐ सानन्दविभवायै नमः