शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ परयन्त्रप्रभेदकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपयंत्र-भेदक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
शत्रुओं के तांत्रिक यंत्रों और चौकियों को तोड़ने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मातङ्ग्यै नमः
ॐ ह्रीं राधिकायै नमः
ॐ त्वष्ट्रे नमः
ॐ लम्बकर्णाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8
ॐ अरिमर्दनाय नमः