शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
'गं' बीज की सिद्धि, मन की गहन एकाग्रता और परम सुख
विस्तृत लाभ
'गं' बीज की सिद्धि, मन की गहन एकाग्रता और परम सुख।
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