शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ सहस्रार हुं फट् नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसुदर्शन मूल मंत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हजारों अरों वाले भगवान सुदर्शन को नमस्कार। यह सर्व-विघ्न विनाशी है।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ह्रीं श्रीं हंसः ह्लसौं स्वाहा।
ॐ विभावर्यै नमः
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः ॥ त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः ॥ त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि ॥ त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि ॥ त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥
मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥
ॐ तपस्विराजे नमः
ॐ बलवते नमः