सर्वव्यापी शिव मंत्र
सर्वाननशिरोग्रीवः सर्वभूतगुहाशयः। सर्वव्यापी स भगवांस्तस्मात् सर्वगतः शिवः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
सभी दिशाओं में मुख, सिर और ग्रीवा वाले, सभी जीवों के हृदय-गुहा में शयन करने वाले, वे भगवान शिव सर्वव्यापी हैं 51।
इस मंत्र से क्या होगा?
कण-कण में ईश्वर की अनुभूति और समदृष्टि का विकास
विस्तृत लाभ
कण-कण में ईश्वर की अनुभूति और समदृष्टि का विकास 51।
जप काल
मानसिक चिंतन।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ महेशकृतसंस्तवाय नमः
ॐ बलभद्रप्रियानुजाय नमः
ॐ नमो भगवते नरसिंहाय नमस्तेजस्तेजसे आविराविर्भव वज्रनख वज्रदंष्ट्र कर्माशयान् रन्धय रन्धय तमो ग्रस ग्रस ॐ स्वाहा। अभयमभयमात्मनि भूयिष्ठा ॐ क्ष्रौम्॥
अत्रोपविश्य लक्ष्मि! त्वं स्थिरा भव हिरण्मयि! सुस्थिरा भव सुप्रीत्या प्रसन्नवरदा भव॥
ॐ मेधा देवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्यमाना। त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान बृहद्वदेम विदथे सुवीराः॥
ॐ पुराणाय नमः