शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ शचीमाङ्गल्यरक्षकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदेवसेनापति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
शची (इंद्राणी) के सुहाग (मांगल्य) की रक्षा करने वाले देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वैवाहिक जीवन के गंभीर संकटों से रक्षा
विस्तृत लाभ
वैवाहिक जीवन के गंभीर संकटों से रक्षा।
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ॐ वामनाय नमः
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पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
उरुदघ्ने नाभिदघ्ने हृद्दघ्ने कण्ठदघ्नके। राधाकुण्डजले स्थिता यः पठेत्साधकः शतम्॥