शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ शरणागतवत्सलाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपरक्षक रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अपनी शरण में आए हुए सबसे बड़े पापी पर भी कृपालु होते हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अहंकार त्याग कर भगवान के चरणों में पूर्ण शरणागति की अवस्था प्राप्त करना
विस्तृत लाभ
अहंकार त्याग कर भगवान के चरणों में पूर्ण शरणागति की अवस्था प्राप्त करना।
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शरजन्मा गणाधीश पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वाञ्छितार्थप्रदर्शनः ॥
स्वदन्त पाशाङ्कुश रत्नपात्रं करैर्दधानो हरिनीलगात्रः । रक्तांशुको रत्नकिरीटमाली भूत्यै सदा मे द्विमुखो गणेशः ॥
अनेकमन्त्रनादमञ्जुनूपुरारवस्खलत्समाजराजहंसवंशणिक्वाणातिगौरवे। विलोलहेमवल्लरीविडम्बिवारुचङ्क्रमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥