शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
द्व्यक्षर साम्राज्य लक्ष्मी
ॐ स्ह्क्ल्रीं हं नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
यह एक कूट-बीज है जो साम्राज्य और शक्ति का ध्वनि-प्रतीक है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
राजसत्ता, उच्च प्रशासनिक सफलता
विस्तृत लाभ
राजसत्ता, उच्च प्रशासनिक सफलता।
जप काल
ग्रहण या अमावस्या की रात्रि में।
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ॐ वज्रकायाय नमः
ॐ वन्द्याय नमः
ॐ ब्रह्मणस्पते त्वमस्य यन्ता सूक्तस्य बोधि तनयं च जिन्व । विश्वं तद्भद्रं यदवन्ति देवा बृहद्वदेम विदथे सुवीराः ॥
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
ॐ यं रः अनादिशक्तिधाम्ने सर्वात्मने करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः
तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः। दिवीव चक्षुराततम्॥