गणेश मंत्र
श्रीमन् नारायण चरणौ शरणं प्रपद्ये। श्रीमते नारायणाय नमः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मैं श्री (लक्ष्मी) से युक्त नारायण के चरण कमलों की शरण लेता हूँ। उन श्रीमान नारायण को मेरा नमन है।
इस मंत्र से क्या होगा?
भगवान की अहैतुकी कृपा, अहंकार शून्यता और शाश्वत कैंकर्य (सेवा) की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
भगवान की अहैतुकी कृपा, अहंकार शून्यता और शाश्वत कैंकर्य (सेवा) की प्राप्ति 49।
जप काल
श्रीवैष्णव संप्रदाय में नित्य प्रपत्ति साधना के अंतर्गत।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सीताशोकविनाशनाय नमः
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ उग्र (अहोबिल) नरसिंहाय नमः
आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्। सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
ॐ भूतभावनाय नमः।
ॐ कपिलायै नमः