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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

गणेश मंत्र

स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्। गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारकनकधारा फलश्रुति (श्लोक 21)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो प्रतिदिन वेद-स्वरूपा, त्रिभुवन-माता रमा की इन स्तुतियों से वंदना करते हैं, वे पृथ्वी पर महान भाग्यशाली और गुणी बन जाते हैं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

प्रचुर भाग्य और विद्वानों के बीच सम्मान की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

प्रचुर भाग्य और विद्वानों के बीच सम्मान की प्राप्ति।

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