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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

अष्टविनायक मंगल श्लोक

स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लाळस्तु विनायकस्तथा मढे चिन्तामणिस्थेवर । लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारअष्टविनायक श्लोक
स्वरूपअष्टविनायक (समग्र रूप)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

मोरगांव के मोरेश्वर, पाली के बल्लालेश्वर, महड के वरदविनायक, थेउर के चिंतामणि, लेण्याद्रि के गिरिजात्मज, ओझर के विघ्नेश्वर, और रांजणगांव के महागणपति—मेरा सदैव मंगल करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अष्टविनायक यात्रा का पूर्ण पुण्य और जीवन में सर्व-मंगल

विस्तृत लाभ

अष्टविनायक यात्रा का पूर्ण पुण्य और जीवन में सर्व-मंगल।

जप काल

नित्य प्रातःकाल या घर से लंबी यात्रा आरंभ करते समय।

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