शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
जयदेव कृत दशावतार नृसिंह स्तुति
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृंगं दलितहिरण्यकशिपुतनुभृंगम्। केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र मंत्र
स्वरूपहिरण्यकशिपु विदारक नरसिंह
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे नरहरि रूप धारण करने वाले केशव! आपके कर-कमलों के अद्भुत नखों ने हिरण्यकशिपु रूपी भँवरे को कुचल दिया है। हे जगदीश्वर हरि! आपकी जय हो।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
हरिभक्ति और प्रभु के प्रति अनन्य प्रेम का जागरण
02
पापों का शमन
विस्तृत लाभ
हरिभक्ति और प्रभु के प्रति अनन्य प्रेम का जागरण। पापों का शमन।
जप काल
कीर्तन के समय या भगवान के शृंगार दर्शन के समय।
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