शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ तीर्थपादाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपतीर्थ-पाद
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके चरणों से तीर्थों (जैसे गंगा) की उत्पत्ति हुई है, उन्हें नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
घर को तीर्थ बनाने हेतु
विस्तृत लाभ
घर को तीर्थ बनाने हेतु
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ॐ साधकप्रचुरानन्दसम्पत्सुखदायै नमः
ॐ दीर्घमायास्वरूपाय नमः।
ॐ कृतिने नमः
श्रीमत्तीक्ष्ण शिखाङ्कुशाक्षवरदान् दक्षे दधानः करैः पञ्चामृतपूर्णकुम्भमभयं वामे दधानो मुदा । पीठ स्वर्णमयारविन्दविलसत् सत्कर्णिका भासुरे आसीनस्त्रिमुखः पलाशरुचिरो नागाननः पातु नः ॥
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो यतो यतो यामि ततो नृसिंहः। बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो नृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये॥