शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ त्रैलोक्यकुटुम्बिन्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
तीनों लोकों को अपना कुटुंब मानने वाली विश्वमाता को नमन 42।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
ॐ शिवनन्दनाय नमः
ॐ रेणुकातनयाय नमः
ॐ महादेवादिकंपूजिताय नमः
ॐ अनिर्देश्यवपुषे नमः
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8