अष्टरूप ब्रह्म मंत्र
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः ॥ त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः ॥ त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि ॥ त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि ॥ त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
आप वाणीमय, चिन्मय (चेतना), आनंदमय और ब्रह्ममय हैं। आप अद्वितीय सच्चिदानंद हैं, आप ही प्रत्यक्ष ब्रह्म हैं और आप ही ज्ञान व विज्ञान से युक्त हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
बौद्धिक विकास, तनाव से मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान
विस्तृत लाभ
बौद्धिक विकास, तनाव से मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान।
जप काल
प्रातःकालीन ध्यान और ज्ञानार्जन के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः। अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा॥
ॐ महाभुजाय नमः
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव
ॐ शिरो मे विष्णुपत्नी च ललाटं अमृतोद्भवा। चक्षुषी सुविशालाक्षी श्रवणे सागरम्बुजा॥
ॐ ह्रीं बटुकाय मम कन्या विवाह बाधा निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
ॐ जृम्भाय नमः