श्रीधर स्वामी कृत नृसिंह वंदना
वागीशा यस्य वदने लक्ष्मीर्यस्य च वक्षसि। यस्यास्ते हृदये संवित् तं नृसिंहमहं भजे॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिनके मुख में वागीश्वरी (सरस्वती), वक्ष पर लक्ष्मी और हृदय में पूर्ण ज्ञान (संवित) का निवास है, उन नरसिंह भगवान का मैं भजन करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
विद्या, वाक्-सिद्धि और धन-संपदा की एक साथ प्राप्ति
पूर्ण ज्ञान का उदय
विस्तृत लाभ
विद्या, वाक्-सिद्धि और धन-संपदा की एक साथ प्राप्ति। पूर्ण ज्ञान का उदय।
जप काल
विद्यारंभ के समय या नित्य अध्ययन से पूर्व।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ हर्त्रे नमः
ॐ हरये नमः
ॐ वसवे नमः
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥
ॐ अधरं गोपिका पातु।
ॐ ब्रह्मचारिणे नमः