वरदविनायक मंत्र
ॐ वरदविनायकाय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
वरदविनायक (वरदान देने वाले) को नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन की पूर्ण संतुष्टि, आंतरिक खुशी और मनचाहे वरदान की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
मन की पूर्ण संतुष्टि, आंतरिक खुशी और मनचाहे वरदान की प्राप्ति।
जप काल
महड पीठ का स्मरण करते हुए।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मत्स्याय नमः
ॐ गोवर्धनधनप्रियायै नमः
ॐ स्तुत्यायै नमः
ॐ भार्गव नरसिंहाय नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
खों खं खं फट् प्राण-ग्रासी प्राण-ग्रासी हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणां शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा।