शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ वरीयाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपसर्वश्रेष्ठ
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो समस्त लोकों में सर्वश्रेष्ठ और महानतम हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
उच्च पद
विस्तृत लाभ
उच्च पद
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
दयासुदृष्टिं कुरुतां मयि श्रीः! सुवर्णदृष्टिं कुरु मे गृहे श्रीः॥
ॐ अनेकपार्श्वाय नमः।
पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।
ॐ वरसिद्धिविनायकाय नमः
ॐ शाकम्भर्यै नमः
ॐ हरये नमः