शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ वर्णाश्रयप्रदाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवर्ण-रक्षक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सभी वर्णों और आश्रमों को आश्रय देने वाले देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
समाज के सभी वर्गों के साथ समरसता
विस्तृत लाभ
समाज के सभी वर्गों के साथ समरसता।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)
ॐ करवालक्रियाकरायै नमः
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥
ॐ सत्याय नमः
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
ॐ जिष्णवे नमः