गणेश मंत्र
ॐ विकरालाय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिनका मुख सर्वग्रासी और अत्यंत विकराल है, उन्हें नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन पर छाए हुए व्यापक और चौतरफा संकटों को एक साथ निगलने हेतु
विस्तृत लाभ
जीवन पर छाए हुए व्यापक और चौतरफा संकटों को एक साथ निगलने हेतु।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विश्वजनन्यै नमः
ऐं ह्रीं श्रीं क्रौं हौं ह्रूं क्षूं लाट भैरवाय क्षूं ह्रूं हौं क्रौं श्रीं ह्रीं ऐं नमः।
ॐ दशग्रीवदर्पघ्नाय नमः
भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥
अहं राष्ट्री सङ्गमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्। तां मा देवा व्यदधुः पुरुत्रा भूरिस्थात्रां भूर्यावेशयन्तीम्॥
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥