शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ यमलार्जुनभञ्जनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपयमलार्जुन-उद्धारक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
यमलार्जुन वृक्षों (नलकुबेर-मणिग्रीव) का उद्धार करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शाप-मुक्ति हेतु
विस्तृत लाभ
शाप-मुक्ति हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
उदीच्यां भीषण भैरवाय नमः उदीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ ऐं ऐं मनो वाञ्छित सिद्धये ऐं ऐं ॐ
अगजानन पद्मार्कं गजाननमहर्निशम् । अनेकदन्तं भक्तानाम् एकदन्तमुपास्महे ॥
ॐ सुरूपाय नमः
तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः। दिवीव चक्षुराततम्॥
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः