ॐ यश्छन्दसामृषभो (मेधा सूक्त)
ॐ यश्छन्दसामृषभो विश्वरूपः। छन्दोभ्योऽध्यमृतात्सम्बभूव। स मेन्द्रो मेधया स्पृणोतु। अमृतस्य देव धारणो भूयासम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो ओंकार सभी वेदों में श्रेष्ठ और विश्वरूप है, जो वेदों के अमृत तत्व से प्रकट हुआ है, वह परमात्मा मुझे मेधा (बुद्धि) से युक्त करे। हे देव! मैं अमृतमय ज्ञान को धारण करने वाला बनूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
धारण शक्ति (Retention/Memory) में अभूतपूर्व वृद्धि, मेधा और प्रज्ञा की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
धारण शक्ति (Retention/Memory) में अभूतपूर्व वृद्धि, मेधा और प्रज्ञा की प्राप्ति।
जप काल
उपनयन संस्कार, प्रात:काल, विद्या-साधना में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥
ॐ धरणीपालकाय नमः
ॐ प्रधान-पुरुषेश्वराय नमः
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः
ॐ रुद्राय रोगनाशाय आगच्छ च राम् ॐ नमः
ॐ अचिन्त्याद्भुतरूपिण्यै नमः