नारद पुराणोक्त अमोघ माला-मंत्र (आंशिक स्वरूप)
यँ यँ हनुमते फल फक्रिया हौत धग् धग् आयुरस्व प ख हेति फट्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
(यह तांत्रिक बीजाक्षरों का समूह है, जिसका कोई लौकिक शाब्दिक अर्थ नहीं होता; यह अग्नि 'धग्' और वायु 'यँ' तत्त्व को जागृत करने वाला नाद है।)
इस मंत्र से क्या होगा?
यह युद्ध, शास्त्रार्थ, और भयंकर व्याधियों में अमोघ विजय प्रदान करता है
धन, धान्य और अतुलनीय यश की प्राप्ति होती है
विस्तृत लाभ
यह युद्ध, शास्त्रार्थ, और भयंकर व्याधियों में अमोघ विजय प्रदान करता है। धन, धान्य और अतुलनीय यश की प्राप्ति होती है 7।
जप काल
अस्त्र बीज (फट्) से युक्त होने के कारण इसे गुरु-निर्देशन में रक्षा-कवच के रूप में जपा जाता है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ऐं (Aim)
ॐ स्वाहायै नमः
या या मनसि वै यस्य विभूतिः प्रतिभाति च। तां तां ददाति तस्याशु धनधान्यगवादिकाम्॥
ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्म-मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र-औषधास्त्र-शस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय...
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये देवासुरमनुष्यबोधः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ देवकीनन्दनाय नमः