गणेश मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ब्रह्मानन्दामृतं तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो साक्षात् ब्रह्मानंद के अमृत स्वरूप हैं, उन राम को नमन।
जप काल
ध्यान-साधना, मोक्ष-कामना हेतु एकांत में मानसिक जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
दक्षिणे चंड भैरवाय नमः दक्षिणे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ कारुण्यामृतपाथोध्यै नमः
ॐ सात्त्विकाय नमः
ॐ कलाधराय नमः
ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं । श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय विराजमूर्तये मेघात्मने श्रीम नरसिंहवपुषे नमः
ॐ ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोऽवतु। (स्वरूप: वाग्वादिनी | लाभ: प्राण-वायु और नासिका की रक्षा | अर्थ: वाग्वादिनी नासिका की सभी प्रकार से रक्षा करें) 8