शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये त्रिलोकात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारऔपनिषदिक ध्यान मंत्र।
स्वरूपत्रिलोक स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो तीनों लोकों के अधिपति और स्वरूप हैं, उन राम को नमन।
जप काल
ध्यान-साधना, मोक्ष-कामना हेतु एकांत में मानसिक जप।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पुण्यगन्धायै नमः
ॐ दीर्घकामाय नमः।
ॐ सुखनिधये नमः
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः
ॐ शत्रुविनाशनाय नमः
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)