शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ योगविदां-नेत्रे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
योगियों के परम मार्गदर्शक
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
योग्य गुरु और कृपा की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
योग्य गुरु और कृपा की प्राप्ति 80
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वेताल शक्ति शर कार्मुक चक्र खट्वाङ्ग मुद्गर गदाम् अङ्कुश नागपाशान् । शूलं च कुन्तं परशुं ध्वजमुद्वहन्तं वीरं गणेशमरुणं सततं स्मरामि ॥
ॐ जानकीवल्लभाय नमः
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
ॐ कङ्कालाय नमः।
ॐ श्रीं ह्रीं भगवत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: भगवती | लाभ: नेत्रों और सूक्ष्म दृष्टि की रक्षा | अर्थ: श्रीं ह्रीं स्वरूपा भगवती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें) 8
ॐ शुभकराय नमः