शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ काली मंत्र
ॐ अग्निगर्भाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपतेज स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अग्नि के गर्भ (मूल तेज) को धारण करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंतर्निहित सुप्त शक्तियों का जागरण
विस्तृत लाभ
अंतर्निहित सुप्त शक्तियों का जागरण।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये जनकनन्दिनी तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ कवये नमः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
ॐ सत्यवाचे नमः
ॐ दशबाहवे नमः
न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दुःखं... चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥