शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ काली मंत्र
ॐ गोपीगृहाङ्गणरतये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारयुगल-नाम मन्त्र; ये मन्त्र गोलोक धाम के अधिष्ठाता श्री राधा-कृष्ण के संयुक्त लीला-माधुर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपबाल-गोपाल
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
गोपियों के घरों के आँगन में क्रीड़ा करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
घर-आंगन में खुशियाँ
विस्तृत लाभ
घर-आंगन में खुशियाँ
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
श्रीमत्तीक्ष्ण शिखाङ्कुशाक्षवरदान् दक्षे दधानः करैः पञ्चामृतपूर्णकुम्भमभयं वामे दधानो मुदा । पीठ स्वर्णमयारविन्दविलसत् सत्कर्णिका भासुरे आसीनस्त्रिमुखः पलाशरुचिरो नागाननः पातु नः ॥
ॐ गुडाकेशाय नमः
ॐ सर्वे वै देवा देवीमुपतस्थुः कासि त्वं महादेवीति। साब्रवीत्- अहं ब्रह्मस्वरूपिणी। मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत्। शून्यं चाशून्यं च॥
ॐ स्वयम्भुवे नमः
ॐ कपालभृते नमः।
ॐ वैष्णव्यै नमः