शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
उग्रतारा (नील सरस्वती)
ॐ ह्रीं उग्रतारायै नीलसरस्वत्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारदशमहाविद्या मंत्र
स्वरूपतारा-काली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे भयंकर संकटों से तारने वाली उग्रतारा और ज्ञानदायिनी नीलसरस्वती, आपको नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वाक् सिद्धि, मूर्खता का नाश, शत्रुओं पर विजय
विस्तृत लाभ
वाक् सिद्धि, मूर्खता का नाश, शत्रुओं पर विजय।
जप काल
मध्यरात्रि साधना (महाचीन क्रम से)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अदृप्तनयनाय नमः
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम् कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
ॐ दुर्गायै नमः
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)
ॐ नवशक्तिसमावृताय नमः