शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम अष्टकम् (समापन श्लोक)
इति श्रीप. प. श्रीवासुदेवानन्दसरस्वतीविरचितं श्रीपरशुरामस्तोत्रं संपूर्णम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र समापन
स्वरूपपरमहंस रचित
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
इस प्रकार परमहंस परिव्राजकाचार्य श्री वासुदेवानंद सरस्वती द्वारा रचित श्री परशुराम स्तोत्र संपूर्ण हुआ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्तोत्र की पूर्णता का फल
विस्तृत लाभ
स्तोत्र की पूर्णता का फल।
जप काल
पाठ के अंत में।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो यतो यतो यामि ततो नृसिंहः। बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो नृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये॥
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
ॐ गोपतये नमः
न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दुःखं... चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥
ॐ अनेकगुणयुक्ताय नमः।
ॐ अध्यक्षरायै नमः