माँ काली मंत्र
ॐ कङ्कालमाल्यधारिण्यै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
कंकालों (मुण्डों) की माला पहनने वाली (जो अहंकारों का प्रतीक है)।
इस मंत्र से क्या होगा?
मृत्यु के भय पर विजय और प्रगाढ़ वैराग्य
विस्तृत लाभ
मृत्यु के भय पर विजय और प्रगाढ़ वैराग्य।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ब्रह्मासि रुद्रस्त्वमिन्द्रस्त्वमग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम्॥
ॐ सर्वलोकरिमर्दनाय नमः
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
ॐ भक्तसाम्राज्यभोगदाय नमः
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
ॐ गौराङ्ग्यै नमः