शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
चण्ड भैरव मंत्र (दक्षिण दिशा)
क्रीं क्रीं ह्रीं चण्ड भैरवाय नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारउग्र मंत्र
स्वरूपचण्ड भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
चण्ड भैरव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
प्रतिस्पर्धियों और शत्रुओं पर अप्रतिम विजय
विस्तृत लाभ
प्रतिस्पर्धियों और शत्रुओं पर अप्रतिम विजय 25।
जप काल
मयूर वाहन का ध्यान करते हुए दक्षिण दिशा में 26।
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तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
ॐ श्री राधायै स्वाहा
ॐ कदल्यै नमः
ॐ नमो भगवते नरसिंहाय नमस्तेजस्तेजसे आविराविर्भव वज्रनख वज्रदंष्ट्र कर्माशयान् रन्धय रन्धय तमो ग्रस ग्रस ॐ स्वाहा। अभयमभयमात्मनि भूयिष्ठा ॐ क्ष्रौम्॥
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